शिव रुद्राक्ष महिमा – Rudraksha in Hindi(हिन्दी)

रुद्राक्ष(Sanskrit), Rudraksha(English)

रुद्राक्ष, रुद्र + आक्ष (रुद्राक्ष ) अर्थात् रुद्र (शिव) की आखो से उत्पन्न और भगवान शिव को प्रिय (आखे)। रुद्राक्ष फल,फुल और वृक्ष तिनो हि है । इसका रंग सफेद,काला,भूरा होता है ! यह गर्म व तर होता है । कुछ विद्वान इसे ठण्डा भी मानते है । यह रक्त बिकार को नस्ट तथा धातु को पुष्ट करता है । शरीर के बाहर और भीतर के किटाणु को मारता है, इससे रक्तचाप व हृदय रोग दूर होने मे मदद मिलती है । फल आवरण स्वाद मे खट्टा-सा लगता है ।

रुद्राक्ष को सभी मालाओ मे सर्वश्रेष्ठ माना गया है तथा रुद्राक्ष माला पर किये गये मन्त्र-जाप आदि का फल भी सभी मालाओ पर किये गये जाप से कई गुणा ज्यादा मिलता है , एसा हिन्दु शास्त्रो मे कहा गया है । विभिन्न मुखको(प्रकार) रुद्राक्ष एक एक दाना और मिलाकर पहनते है. रुद्राक्ष माला जप शिवाय पहन बि सकते है. ज्यादा तर माला ५ मुखको रुद्राक्ष से बन्ता है क्यूकि ये ज्यादा मिलता है.

श्रीमददेवी भागवत से रुद्राक्ष उत्पति कथा (प्राचिन कथा)

भगवान नारायण(विष्णु भगवान ) और नारद संबाद ।

नारद जी ने कहा – अनघ! रुद्राक्ष क्यो सबसे श्रेष्ठ माना जाता है – इसका क्या कारण है ? सो बतानेकी कृपा कीजिये ।
भगवान नारायण कहते है – मुने ! प्राचिन समयकी बात है , यही बिषय स्वामी कार्तिकेयने भगवान शंकरसे पुछा था । उन्होने उनके प्रति जो कुछ कहा था,वही मे तुमसे कहता हु,सुनो ।

भगवान शंकर ने कहा – षडानन ! मे तत्वपूर्वक संक्षेपरुपसे तुम्हारे प्रश्नका समाधान करता हू सुनो ! बहुत पहले की बात है , त्रिपुर नामका एक दैत्य था । कोइ उसे जीत नही सकते थे । उसके द्वारा ब्रह्म,विष्णु आदि समस्त देवता महान कस्ट पा रहे थे । तब सब लोगोने मुझसे प्रार्थना की । एसी इस्थितीमे मे त्रिपुरासुरके बिषय विचार करने लगा । मेरे एक दिव्य अस्त्र का नाम ‘अघोर’ है । वह अत्यन्त बिशाल एव परम सुन्दर है । उसे सम्पूर्ण देवता की आकृति मानते है । उस भयङ्कर अस्त्र से ज्वाला निकलती रहती है । समस्त उपद्रवको शान्त करनेकी उसमे शक्ति है । मेने त्रिपुर का बध और देवताओ की उद्दार करनेके लिये उसी अपने अघोरसंग्यक अस्त्र का चिन्तन किया । बहुत समय तक मेरी आखे मुदी रही । तत्पस्चात मेरे नेत्रोसे कुछ जलकी बुंदे पृथ्वीपर पड गयी । महासेन ! उन्ही अश्रु बिन्दुओसे महान रुद्राक्ष वृक्ष उत्पन्न हो गये ।

मेरी आज्ञासे समस्त देवताओ के कल्याणाथ्र उन्ही वृक्षओ से अडतीस प्रकारके रुद्राक्ष फल रुप मे प्रकट हुए । कपिलवर्णवाले बारह प्रकार के रुद्राक्षकी सुर्यके नेत्रोसे,स्वेतवर्णके सोलह प्रकारके रुद्राक्षकी चन्द्रमा के नेत्रोसे तथा कृष्णवर्णवाले दश प्रकार के रुद्राक्षकी अग्निके नेत्रोसे उत्पति मानी जाती है । येही इनके अडतीस भेद है । स्वेत वर्ण वाले जाती ‘ब्राह्मण’,रक्तवर्ण वाला ‘क्षेत्रीय’,मिले हुए रंगवाला ‘वैश्य’ तथा कृष्णवर्णवाला ‘शुद्र’कहा जाता है (अर्थात् तत्तदवर्णवाले पुरुषोको तत्तदवर्णके रुद्राक्ष धारण करने चाहिये).

रुद्राक्ष पहिचान करने के तरिका
– प्रत्यक रुद्राक्ष मे धारी(लकीर/धारी) होता हे,येदि रुद्राक्ष मे एक धारी हो गया तो एक मुखी रुद्राक्ष कहते है, येदि दो तो दो मुखी रुद्राक्ष. शिव पुराण और देवी भागवत मे एक से लेकर चौदह मुखी रुद्राक्ष तक की महिमा मिलता है , सो ! येदि तिन लकीर तो तिन मुखी रुद्राक्ष, ४,५,६ से लेकर चौदह मुखी आदि तक का रुद्राक्ष महिमा आप पढ और खरिद सकते है ! बिशेष रुद्राक्ष जिसको गौरी शंकर और गणेश कहते है ,जिस्के आकृति कुछ अलग से है उसके भी महिमा इदर दिया गया है । एदी कुछ रुद्राक्ष खरीदने है और बिस्तृत के लिय Read More दाबिये । ओम नम: शिवाय: ।

एक मुखी रुद्राक्ष से चौदह मुखी रुद्राक्ष महिमा

१) एक मुखी रुद्राक्ष – एक मुखी रुद्राक्ष मे स्रिफ़ एक धारी (लकीर वा मुख) होता है । सभी रुद्राक्ष गोलमे मिल्ने के बाज्बुद भी य रुद्राक्ष चन्द्र आकार आकृति मे हि मिलता है । लेकिन कुछ अलग रुद्राक्ष गौरी शंकर रुद्राक्ष और गणेश रुद्राक्ष भी अलग आकृति मे मिलता है ।

चन्द्र आकार होने के बाज्बुद इसको हम काजु दाना भी बोलते है । नेपाल के गोलवाला बहुत कम मिलता है ।  पशुपतिनाथ मन्दिर नेपाल मे साल मे एक बार गोल एक मुखी रुद्राक्ष, नागमणी,पारस मणी का दर्शन होता है । बालाचतुर्दशी पर्व के दुसरे दिन अमावस्या के दिन सुबह य दर्शन समारोह होता है । एक मुखवाला रुद्राक्ष स्वयम् भगवान शंकर का विग्रह समझा जाता है । यीस रुद्राक्ष को परब्रह्म भी कहते है । जो इसको धारण और पुजा करता है वों पर ब्रह्म मे लिन होता है । Read More

2) दो मुखी रुद्राक्ष – दो मुखी रुद्राक्ष मे स्रिफ़ दो धारी (लकीर वा मुख) होता है । दोमुखी रुद्राक्ष एक हिसाब से दुर्लभ रुद्राक्ष माना जाता है लेकिन नेपाल मे य अच्छा दोकान मे मिलता है । इसके दाम चौदह मुखी रुद्राक्ष से तुलना होता है । क्योकी एक से चौदह मुखी रुद्राक्ष मे दो मुखी रुद्राक्ष और चौदह मुखी रुद्राक्ष का दाम ज्यादा है। दो मुख वाला रुद्राक्ष शंकर जी और पार्वती माता का रुप मानते है ।

दो मुखी रुद्राक्ष को अर्धनारेश्वर रुद्राक्ष भी कहते है. अर्धनारेश्वर का मतलब है आधा शिव जी और आधा पार्वती माता । इसलिये दो मुखी रुद्राक्ष को शिव पार्वती रुद्राक्ष कहते है । Read More

३) तीन मुखी रुद्राक्ष  – तीन मुखी रुद्राक्ष मे तीन धारी (लकीर वा मुख) होता है । तीन मुखी रुद्राक्ष एक साधारण रुद्राक्ष हे लेकिन ४,५ इत्यादी मुखी रुद्राक्ष के तुलना मे तीन मुखी रुद्राक्ष कम मिलता है।

तीन मुखी रुद्राक्ष को भगवान ब्रह्म विष्णु और महेश का प्रतिक माना गया हे और जिसमे तीन मुख हो वों रुद्राक्ष स्वयम् अग्नि स्वरुप हे । ज्यादा तर सभी पुराण मे तीन मुखी रुद्राक्ष को अग्नि स्वरुप बताया गया हे । तीन मुखी रुद्राक्ष को तीन प्रकार के अग्नि स्वरुप भी माना जाता हे । यह मान्यता भी हे की तीन मुखी रुद्राक्ष के नीचे शिव जी,बीच हे विष्णु भगवान और उपर ब्रह्म जी का बास होता है। Read More

४) चार मुखी रुद्राक्ष – चार मुखी रुद्राक्ष मे चार धारी (लकीर वा मुख) होता है । चार मुखी रुद्राक्ष एक साधारण रुद्राक्ष हे लेकिन य रुद्राक्ष बढे बढे पाप को भी नाश कर डालता हे ।  दाना मिल्ने के हिसाब से ४,५ ,६ मुखी रुद्राक्ष को साधारण रुद्राक्ष के अंक मे रखा गया है ।

चार मुखी रुद्राक्ष को भगवान चतुर मुख ब्रह्म का प्रतिक माना गया है। इस रुद्राक्ष मे भगवान ब्रह्म और माता सरस्वती का सदैव बास होता है। इसके सिभा सभी भगवान शिव पार्वती,लक्ष्मी नारायण उसपर प्रसन्न होते है जो चार मुखी रुद्राक्ष को पुजा करता हो वा धारण करता हो ।चार मुखी रुद्राक्ष काम क्रोध लोभ मोह को नाश करके धर्म अर्थ काम मोक्ष प्रदान करता हे। Read More

५) पाँच मुखी रुद्राक्ष – पाँच मुखी रुद्राक्ष मे पाँच धारी (लकीर वा मुख) होता है । पाँच मुखी रुद्राक्ष सबसे साधारण रुद्राक्ष है इसलिये रुद्राक्ष की माला ज्यादा तर पाँच मुखी का होता है । बडा माला मे ५४ और १०८ और छोटा रुद्राक्ष माला मे १०८ रुद्राक्ष संयोजन होकर रुद्राक्ष माला बनता हे । पाँच मुखी रुद्राक्ष का एक दाना और पुरा माला बढे बढे पाप को भी नाश कर डालता है।  रुद्राक्ष माला मे जाप करने का फायदे का बर्णन नही हो सकता क्यो की माला मे हम जितना जाप करते है रुद्राक्ष माला मे जाप करने से दु गुणा होता है।

जिस रुद्राक्ष मे स्रिफ पाँच मुख हो उस रुद्राक्ष को काल अग्नि स्वरूप रुद्र जानना चाहिय । काल अग्नि रुद्र स्वयम् भगवान शिवजी (शंकरजी ) का स्वरूप है । इस रुद्राक्ष को भी शिव जी के पंच ब्रह्म मन्त्र माना गया है पाँच ब्रह्म मन्त्र का मतलब हे भगवान पशुपतिनाथ के पाँचो मुखो के मन्त्र । शिव जी के भी पाँच मुख हे इसलिये पंचमुखी महादेव कहते है भगवान पशुपतिनाथ के पाँच मुख का नाम अघोर,वामदेव,सद्दोजात,तत्पुरुष और इशान है . Read More

६) छे मुखी रुद्राक्ष – छे मुखी रुद्राक्ष मे छ धारी (लकीर वा मुख) होता है । छ: मुखवाला रुद्राक्ष स्वामी कार्तिकेयका विग्रह है । पुरुषको उसे अपने दाहिने हाथमे धारण करना चाहिय ।

स्वामी कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के बडा पुत्र है , छोटा पुत्र का नाम गणेश है । कोइ विद्वान पुरुष इस रुद्राक्ष को गणेश भी कहते है। इस रुद्राक्ष को शिव परिवार भी कहा गया है। Read More

७) सात मुखी रुद्राक्ष – सात मुखी रुद्राक्ष मे सात धारी (लकीर वा मुख) होता है । सात मुखवाले रुद्राक्षका नाम महाभाग अनंग है। महाभाग अनंग भगवान कामदेव के दुसरा नाम है।

सात मुखी रुद्राक्ष को सप्त मात्रिका भी कहते है। सप्त मात्रिका मे सभी सात भगवान के बास और शक्ति होता है कुमारी (कुमार),इन्द्रायेनी(इन्द्र),ब्रह्मयनी(ब्रह्म),रुद्रानी(रुद्र),चामुण्डा(चंडेश्वोरमहादेव),वाराही(वराह विष्णु भगवान),महेश्वरी(महेश्वोर) । सात मुखी रुद्राक्ष को महा लक्ष्मी रुद्राक्ष भी कहते है। Read More

८) आठ मुखी रुद्राक्ष – आठ मुखी रुद्राक्ष मे आठ धारी (लकीर वा मुख) होता है इसलिये इस रुद्राक्ष का नाम आठ मुखी रुद्राक्ष है। आठ मुखवाले रुद्राक्षको साक्षात भगवान गणेशकी प्रतिमा माना जाता है।

आठमुख वाले रुद्राक्षके धारण करनेसे सभी गुण उनके लिय सुलभ हो जाते हे । Read More

९ ) नौ मुखी रुद्राक्ष – नौ मुखी रुद्राक्ष मे नौ धारी (लकीर वा मुख) होता है इसलिये इस रुद्राक्ष का नाम नौ मुखी रुद्राक्ष पडा है।

नौ मुखवाले रुद्राक्ष भैरवका स्वरुप है। उसे बाही भुजा मे धारण करना चाहिय । Read More 

१०) दश मुखी रुद्राक्ष – दश मुखी रुद्राक्ष मे दश धारी (लकीर वा मुख) होता है इसलिये इस रुद्राक्ष का नाम दशमुखी रुद्राक्ष है।

जिसमे दश मुख हो वोंह रुद्राक्ष साक्षात जनार्दनका(विष्णु भगवान) का विग्रह है। Read More

११) ग्यारह मुखी रुद्राक्ष – ग्यारहमुखी रुद्राक्ष मे ग्यारह धारी (लकीर वा मुख) होता है इसलिये इस रुद्राक्ष का नाम ग्यारह मुखी रुद्राक्ष पडा है।

ग्यारह मुखवाले रुद्राक्षको ग्यारह रुद्रोकी प्रतिमा कहा गया है । इस रुद्राक्ष को एकदश रुद्र भी कहते है । ग्यारह रुद्रो की नाम कपाली ,अहिबुर्धन्य,इत्यादी है । हनुमान जी को भो की ग्यारह रुद्रो मे एक कहा गया है । Read More

१२) बारह मुखी रुद्राक्ष – बारहमुखी रुद्राक्ष मे बारहधारी (लकीर वा मुख) होता है इसलिये इस रुद्राक्ष का नाम बारह मुखी रुद्राक्ष है ।

जिसने बारह मुखवाले रुद्राक्षको अपने कर्ण मे धारण कर लिया है,उसके द्वारा १२ सुर्यो की नित्य उपासना हो चुकी। Read More

१३) तेरह मुखी रुद्राक्ष – तेरहमुखी रुद्राक्ष मे तेरह धारी (लकीर वा मुख) होता है इसलिये इस रुद्राक्ष का नाम तेरह मुखी रुद्राक्ष है।

येदि तेरह मुख वाला रुद्राक्ष मिल जाय तो उसे सम्पूर्ण कामनाओ और सिद्धियोका देनेवाला स्वामी कार्तिकेयके समान सम्झना चाहिय । Read More 

१४) चौदह मुखी रुद्राक्ष – चौदहमुखी रुद्राक्ष मे चौदह धारी (लकीर वा मुख) होता है इसलिये इस रुद्राक्ष का नाम चौदह मुखी रुद्राक्ष है ।


प्रिये पुत्र ! येदि सौभाग्यबश चौदह मुख वाला रुद्राक्ष मिल जाय तो उसे अपने मस्तक पर धारण करना चाहिय । वह स्वयम् मेरा विग्रह है । Read More 

इन रुद्राक्ष के धारण से विभिन्न प्रकार के सभी छोटे बढे पपोका नाश होता है और महान शुभ फलकी प्राप्ति होती है ।

१५) गौरी शंकर रुद्राक्ष –  गौरी शंकर रुद्राक्ष को जुड़वां रुद्राक्ष कहते है क्योकी पेड मे हि यह रुद्राक्ष एक आपस प्राकृतिक रूप से जुड़ जाया करता है । गौरी शंकर रुद्राक्ष का दाना और दुसरे रुद्राक्ष के मुकाबले बडा होता क्योकी यह रुद्राक्ष दो दाना मिल्कर बन्ता है ।

गौरी माता पार्वती का प्यारा नाम है और शंकर जी का प्यारा नाम है । गौरी शंकर रुद्राक्ष को शिव पार्वती रुद्राक्ष कहते है । यह रुद्राक्ष बराबर हो गया तो बहुत अच्छा माना जाता है ।  Read More

१६) गणेश रुद्राक्ष – गणेश रुद्राक्ष मे गणेशजी के जैसे सूँढ होता है । प्राकृतिक रुपसे यह सुड आने के कारण इस रुद्राक्ष को गणेश रुद्राक्ष कहते है ।  Read More

१७) रुद्राक्ष माला – भगवान नारायण नारद मुनि से कहते है ! मुने रुद्राक्ष धारण करनेवाला पुरुष सदा देवताओसे सुपुजित होता है । षडानन ! एक सौ आठ रुद्राक्षकी अथवा पचास एबम सत्ताईस दनोकी माला बनाकर उसे धारण करे अथवा जप करे तो उसके द्वारा अनन्त फल मिलता है । येदि पुरुष एक सौ आठ रुद्राक्षकी माला धारण करता है तो उसे प्रत्यक क्षणमे अश्वमेघ यज्ञके फलकी प्राप्ति होती है ।  Read More

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